
Hito Steyerl’s ‘Green Screen’ (2023), jointly presented by Esther Schipper and Andrew Kreps, features a large-scale installation combining an experimental LED wall made from recycled glass bottles with living plants and AI-generated imagery. Bioelectrical signals from the plants shape the work’s evolving sound and low-resolution animations of blooming flowers, creating a dialogue between organic life and digital systems. Reflecting on ecological interdependence and technological dependency, the installation reimagines plants as active agents within contemporary media environments.

ग्रीन स्क्रीन को प्रकृति और प्रौद्योगिकी के बीच के द्वन्द्वात्मक संबंध और दोनों के बीच लगातार धुंधली होती सीमाओं पर एक आलोचनात्मक टिप्पणी के रूप में समझा जा सकता है।
इस कृति में हिटो स्टेयरल ( Hito Steyerl) जो एक कलाकार, लेखिका और फिल्म निर्माता हैं, इस रचना में विभिन्न कला विधाओं में अपनी कुशलता का प्रयोग करती हैं। वह पौधों को केवल सजावटी या निष्क्रिय तत्वों के रूप में प्रस्तुत न करते हुए उन्हें कलाकृति में सक्रिय भागीदार बना देती हैं। उनके जैव-विद्युत (bioelectrical) संकेत विकसित होती ध्वनियों और कृत्रिम बुद्धिमता-जनित दृश्य सामग्री को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार पौधों को कलाकृति के निर्माण में भागीदारी देकर स्टेयरल उस मानव-केंद्रित धारणा को चुनौती देती हैं कि तकनीक केवल मनुष्यों के लिए बनाई जाती है और उन्हीं के नियंत्रण में होती है। इस रचना में प्रकृति और तकनीक मिलकर अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करते दिखाई देते हैं।
इस स्थापना-कला (installation) में कई महत्वपूर्ण विषय उभरकर सामने आते हैं:
- पारिस्थितिक परस्पर-निर्भरता (Ecological Interdependence): पुनर्चक्रित काँच की बोतलों से बनी LED दीवार, जीवित पौधे और AI प्रणालियाँ मिलकर आपस में जुड़ा हुआ तंत्र बनाती हैं। यह दर्शाता है कि आधुनिक जीवन जैविक और तकनीकी नेटवर्कों के बीच संबंधों से निर्मित होता है, या उस पर निर्भर है।
- तकनीकी निर्भरता (Technological Dependency): यह कृति दिखाती है कि डिजिटल प्रणालियाँ हमारे संसार को समझने के तरीकों को किस प्रकार प्रभावित और नियंत्रित करती हैं। साथ ही, यह भी याद दिलाती है कि ये प्रणालियाँ अंततः प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर निर्भर हैं।
- सक्रियता और संचार (Agency and Communication): पौधों के संकेतों को ध्वनि और दृश्य रूपों में बदलकर यह कृति पौधों को मौन पृष्ठभूमि के बजाय संचार करने वाले सक्रिय जीवों के रूप में प्रस्तुत करती है।
- भौतिक स्थिरता और पुनर्चक्रण (Material Sustainability): LED दीवार में पुनर्चक्रित काँच की बोतलों का उपयोग मीडिया तकनीकों की पर्यावरणीय भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित करता है और तकनीकी संरचनाओं में संसाधनों के पुनः उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
शीर्षक “ग्रीन स्क्रीन” भी विशेष महत्व रखता है। सामान्यतः ग्रीन स्क्रीन फिल्म निर्माण में प्रयुक्त एक तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी पृष्ठभूमि को दूसरी छवि से बदला जा सकता है। स्टेयरल इस अवधारणा के साथ खेलती हुई प्रतीत होती हैं, जहाँ “हरा” (प्रकृति) केवल पृष्ठभूमि नहीं रह जाता, बल्कि वह स्वयं एक सक्रिय उपस्थिति बनकर दर्शकों के देखने और सुनने के अनुभव को प्रभावित करता है।
इस प्रकार यह कृति दर्शकों के सामने कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न रखती है: जैसे यह कि मनुष्य के जीवन चक्र की तरह उपयोग हो चुकी भौतिक वस्तुओं के नव-जीवन की क्या संभावना है? और क्या भविष्य की कला और मीडिया परिवेश केवल मनुष्यों और मशीनों के सहयोग से नहीं, बल्कि मनुष्यों, मशीनों और अन्य जीवित प्राणियों (प्रकृति के विभिन्न तत्व) के साझा सहभाग से निर्मित हो सकते हैं?

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