Art News India

A magazine covering art, culture, and events.

पंकज निगम की कविताएँ

चित्र मौन की भाषा है पर जब एक चित्रकार कविता के रूप में चित्र रचता है तो वहाँ मौन सबसे अधिक मुखर होता दिखाई देता है, पंकज निगम की कविताएँ कुछ ऐसी ही हैं, बहुत कुछ कहती हुईं फिर भी मौन। उनका पहला कविता संग्रह ‘मौन’ हमारे सामने उस दुनिया की आवाजों को एक साथ रखता है जो सुनी गई हैं और अनसुनी भी कर दी गई हैं। इन आवाजों में पिता है, मनुष्य का लौटना है, उसके लौटने की आश्वस्ति है, कुछ न कहकर भी सबकुछ कह देने का साहस है, “ऐसे भी तो सम्भव है, कि मौन रहूँ, और तुम तक पहुंचे, मेरा प्रेम।”

पंकज निगम की कविताओं में घर और संसार, इन दो छोरों के बीच जो कुछ घटित और अघटित है, उसकी अभिव्यक्ति है। प्रेम की बात कुछ कविताओं में है तो कहीं वह नदी, बच्चियों, शहर, रास्तों और अन्य दुनियावी अनुभवों की बात भी करते हैं। पर इन सबके बीच वह लगातार बदलते समय के साथ बदलते मनुष्य और उसकी स्थितियों की तरफ भी संकेत करते चलते हैं।

“मैं, बड़े अजीब से, मकान में रहता हूँ। दरवाजा खोलते ही, शहर आ जाता है, घर के अंदर।” अंदर की दुनिया में बाहर की दुनिया के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर उनकी चिंताएँ अलग तरह से बोलती हैं, “मैं, चुपचाप बैठा रहता हूँ, इस अजीब मकान में, और शहर भरता जाता है, मेरे अंदर।” यह शहर का अंदर भरते जाना एक संवेदनशील मन की व्यथा है।

पंकज निगम की कविताओं के बारे में सुभाष राय लिखते हैं, “पंकज की कविताओं में वैविध्य है। उनकी नजर उन सब पर है, जो यातना में हैं, जो वंचित हैं। उनकी कला और कविता केवल उनका शौक नहीं है, वह अपना उद्देश्य बार-बार स्पष्ट करती दिखाई पड़ती है।” यह उद्देश्य कई बार कविता के सामने भी प्रश्न खड़े करता है। पंकज के लिए कविता कला का ही दूसरा पक्ष है। कई बार एक कलाकार जो बात चित्र में नहीं कह पाता उसे कहने के लिए कविता का सहारा लेता है। दोनों ही कलाओं में संवेदनशीलता और वैचारिकता मुख्य तत्व हैं। शिल्प दोनों में है और दोनों में ही बिम्ब का अत्यधिक महत्व है। इसीलिए हम देख सकते हैं कि पंकज की अनेक कविताएँ किसी दृश्य की तरह सामने आती हैं।

इस संग्रह में पंकजजी के चित्र भी शामिल हैं जो इन कविताओं के प्रभाव को बढ़ाते हैं। गौतम चटर्जी ने ठीक ही लिखा है, “पंकज चित्र लिखते है और कविता आंकते हैं।” इस बात को इस तरह भी कहा जा सकता है कि वह कविता आंकते हैं और चित्र लिखते हैं, यानी दोनों कलाएँ उनके लिए समानांतर क्रियाएँ हैं, और दोनों में सबसे महत्वपूर्ण बात मनुष्य के होने की संभावना की तलाश है।

पुस्तकः मौन

कविः पंकज निगम

प्रकाशकः प्रलेक प्रकाशन, ठाणे, महाराष्ट्र

वर्षः 2026

डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज

2 responses to “पंकज निगम की कविताएँ”

  1. sachinn mehani Avatar
    sachinn mehani

    Amazing person amd amazing thoughts. … Putting feeling in words as aart of great person.
    Thanks Pankaj ji to be part of our life.

Leave a Reply

Discover more from Art News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading