
अनामिका की कला प्रदर्शनी रूटेड टूगेदर इन दिनों इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमलादेवी ब्लॉक की गैलरी में चल रही है। 5 मई से शुरु हुई यह प्रदर्शनी 19 मई तक देखी जा सकती है। टेरेन आर्ट (Terrain art) की मेधना मित्रा (Meghna mitra) ने इसे क्यूरेट किया है।


अनामिका के काम पिछले कई साल से देखता रहा हूँ। उनकी रुचि अमूर्तन में है जिसमें अब न्यूनतम कला को समाहित करते हुए उन्होंने अपनी एक अलग तरह की कला भाषा बनानी शुरु कर दी है। इस प्रदर्शनी में उनके कुछ पिछले सालों के काम के साथ ही एकदम नये काम भी शामिल हैं जो उनकी कला के विकास को दर्शाते हैं। इस प्रदर्शनी के कामों को उन्होंने जीवन और रूप की खोज कहा है, हालांकि उनकी रचनाओं में दोनों ही उस तरह से सामने नहीं आते हैं, जैसा हम आकृतिमूलक कामों में, या ज्यामितीय अमूर्तन में देखने के अभ्यस्त रहे हैं।


इन रचनाओं में टैक्सचर और रंगों की परतों की उपस्थिति के बीच कुछ गोल और कुछ अज्ञात रूप हमें दिखाई देते हैं तो कहीं-कहीं मछली और पक्षी के आभासी रूप भी हैं, और कहीं वह मानवीय रूपों का आभास भी देते हैं। इन रूपों को वह कैनवास पर इस तरह से रचती हैं, जैसे अंतरीक्ष में या समुद्र की गहराई में जीवन की हलचल को खोज रही हैं।

अनामिका के चित्रों को देखें तो उनमें ज्यादातर में गतिशीलता है, जीवन की गतिशीलता। इसीलिए उनके कैनवास पर हमेशा कुछ घटित होता दिखाई देता है। उनकी रंग योजना इसमें उनकी मदद करती है। ज्यादातर वह हरे, लाल और नीले रंग का प्रयोग करती हैं जिनके मिश्रण से वह नई रंगतों की खोज करती हैं।

यह खोज उन्हें जीवन के शांत और स्थिर पक्ष तक ले जाता है, जो हलचल के बाद भी स्थिरता, और इसी बहाने होने की प्रमाणिकता की खोज करता है। इस होने में इस बात का अत्यधिक महत्व है कि इस सृष्टि में जो भी जैविक उपस्थिति है वह एकसाथ जड़ जमाए हुए हैं जो उन्हें स्थिर और संयुक्त करता है। जल के साथ जीव और प्रकृति के साथ जीव के अस्तित्व का आधार संयुक्त भाव है जो इन रचनाओं में देखा जा सकता है। प्रदर्शनी में अनामिका ने अपनी छापा कला के कुछ काम भी शामिल किये हैं, जो उनकी कलात्मक खोज का एक अलग आयाम हैं।
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लेखकः डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज, Mob. 9871699401


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